ग़ैरों से शादी करना ज़िना है
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*🧑💻हमारी कोशिश..!! मुआशरे की इस्लाह*
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【 كُلُّ نَفْسٍ ذَآئِقَةُ الْمَوْت 】
*आख़िर मरना हैं!*
*❥═❥ ❥ पोस्ट :- 14 ❥ ❥═❥*
*🪄 अपनों की बातें अपनों तक ✍🏻*
*" ग़ैर मुस्लिमों से शादी " के हालात पर कुछ बातें :-* दीन ए इस्लाम एक मुक्कमल दीन और जिस में हर एतेबार से तालीमात हमारे लिए बयान किये गए है इंसान के लिए उसकी जान उसका माल और उसकी इज़्ज़त बहुत अहमियत रखती है।
दीन ए इस्लाम ने उसके जान कि तहफ़्फ़ुज़ को भी बयान फ़रमाया है उसकी इज़्ज़त और उसका माल इनके भी तहफ़्फ़ुज़ को दीन ए इस्लाम ने बयान फ़रमाया है हर मुसलमान चाहे वो मर्द हो या औरत उसके माल उसकी इज़्ज़त और उसके जान कि हिफ़ाज़त कैसे मुम्किन है दीन ए इस्लाम के उसूल इस पर बिल्कुल वाज़ेह है।
" हया '' ये इस्लाम और इमान कि अलामत है हया मुसलमान मर्दो और औरतों कि एक पहचान है उनकी अलामत है के उनके अंदर हया का पहेलु वो ग़ालिब रहता है और रहना भी चाहिए।
शरीअत ने हमें ज़ाहिर के एतेबार से इस का हुक़्म इर्शाद फ़रमाया है बेशक दिलों के मालूमात अल्लाह तआला जानता है और खुद क़ुरआन ए मजीद में इर्शाद फ़रमाता है अल्लाह आँखों कि खयानत को भी जानता है और जो भी दिलो में छुपा हुआ है रब त'आला वो भी जानता है तो ये कह देना के सिर्फ दिल से ही पर्दा करे बाकि चाहे जैसे मर्ज़ी है वैसे रहे नहीं बल्कि हमें ज़ाहिर के एतेबार से भी हमें ये हुक़्म इर्शाद फ़रमाया गया है इस लिए अल्लाह तआला ने इर्शाद फ़रमाया "आप मोमिन मर्दो से इर्शाद फरमाये क्या कि वो मोमिन मर्द अपनी निग़ाहों को झुकाये रखे और अपनी शर्म गाहों कि हिफाज़त करे और यही हुक़्म अल्लाह त'आला ने मोमिन औरतों के लिए भी इर्शाद फ़रमाया है अपनी निगाहों को चुकाये रखे और अपनी पाक दामनी और अपनी शर्मगाहों कि हिफाज़त करे।
यही पर्दा यही हया जो हमारी बहनें अगर इख़्तियार करती है फिर शैतान के शर से वो महफ़ूज़ हो जातीं है हया अल्लाह पाक को बहुत पसन्द है और यही हया बा पर्दा औरतें जिनका मुआशरे के अंदर आना होता है और उन्हें इज़्ज़त और वक़ार कि नज़र से देखा जाता है पर्दादार औरत को बुरी नज़र से नहीं देखा जाता वो लोगो कि मैली नज़रो से महफ़ूज़ हो जातीं है।
मुआशरे के अंदर बे पर्दगी और बेहयाई कि वजह से जो बिगाड पैदा होता है अगर हया को इख़्तियार किया जाये और पर्दे को इख़्तियार किया जाये तो मुआशरे के अंदर अमनों सुकून होगा और इसे किसी तरह के बिगाड और क़त्लो ग़ैरत अगर इसके पीछे देखा जाये कहीं न कहीं बेपर्दगी जैसे काम होते है तो इन सब से बचें हमारे लिए हमारे घर कि ख़्वातीनो के लिए बहुत ज़रूरी है।
ये क़तअन गुमान नहीं करना चाहिए के शरीअत कि तरफ से औरतों के ऊपर बहुत ज़्यादा ज्यादती है या उनको घर में कैद किया है ये सारी बातें आज के दौर में उठ रही है और हमारी भोली भाली ख़्वातीन न समझी में ऐसे लोगों का साथ देती है दरअसल उनको अपना हमदर्द समझ रही होती है जो असल में इनको जहन्नुम कि आग में जाने का रास्ता दे रहे होते है आज पूरी दुनिया इस्लाम को ख़त्म करने में लगी है इस के लिए फ़िल्में ड्रामे बनाये जा रहे है जिसे बेहयाई प्रमोट होती है हमारी घर कि ख़्वातीन इनकी गन्दी साज़िशों में मुलव्विस होती नज़र आती है।
इस्लाम ने औरत के तहफ़्फ़ुज़ के लिए उसे पर्दे में रहने का हुक़्म इर्शाद फ़रमाया है इस्लाम ने उस औरत के तहफ़्फ़ुज़ के लिए इस लिए फ़रमाया है मिसाल के तौर पे अगर कोई मीठी चीज़ है तो अब अगर उसे मक्खियों से बचाना है या दीगर किसी और चीज़ से बचाना है तो उसे डक कर रखा जाता है आप के पास अगर कोई ज़ेवर या खज़ाना हो तो आप उसे बड़े अहतियात से संभाल कर रखेंगे क्योंकि उस कि हिफाज़त रहे और किसी कि नज़र भी उसकी तरफ न पड़े।
वैसे ही शरीअत ने औरत कि इज़्ज़त में इजाफ़ा करने के लिए औरत के वक़ार को बुलन्द करने के लिए इसे ढापने पर्दे में रहने का हुक़्म इर्शाद फ़रमाया है और यही हया से इसे तबीर किया है।
मगर अफ़सोस है आज कल कि इस्लामी बहने इन फ़ज़ीलतों से न वाकिफ़ है उनकी आँखों पर बेहयाई कि इस कदर पट्टी बंदी है गैर मुस्लिमो से शादी कर के अपनी आख़िरत को बर्बाद कर देतीं है और हमेंशा हमेशा के लिए अपना ठिकाना जहन्नुम में बनाती है! *ख़ुदारा इससे बाज़ आ जायें।*
जो वक़ार जो इज़्ज़त इस्लाम ने दिया है न इसे पहले किसी को मिला है न इसके बाद किसी को मिल सकता है।
*बाक़ी अगली पोस्ट में...!*
*✍🏻_____फ़िक़्र ए आख़िरत*

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