एक शौहर की गैरत
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*🧑💻हमारी कोशिश..!! मुआशरे की इस्लाह*
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【 كُلُّ نَفْسٍ ذَآئِقَةُ الْمَوْت 】
*आख़िर मरना हैं!*
*❥═❥ ❥ पोस्ट :- 16 ❥ ❥═❥*
*🪄 अपनों की बातें अपनों तक ✍🏻*
मुसलमानों के कल्चर में हया है शर्म है गैरत है बेपर्दगी बेहयायी मुसलमानो के कल्चर में कभी नहीं रही है आज मुसलमान बद किस्मती के साथ गैर मुस्लिमो के पीछे चल चल के यहाँ तक आ गये के उसकी अपनी बहने बेपर्दा उसकी अपनी बीवी बेपर्दा उसकी अपनी घर कि औरतें बेपर्दा है मगर मुसलमान कि गैरत जोश नहीं खाती कि कम अज़ कम कुछ नसीहत ही कर दे समझा ही दे तुम क्यूँ बेपर्दगी कर रही हो।
एक वक़्त था एक काज़ी कि अदालत में एक औरत ने मुक़दमा दायर किया के उसका शौहर उसको माहेर नहीं दे रहा था अब काज़ी के सामने औरत भी अदालत में और अब औरत ने गवाह पेश किये अब गवाहों ने कहा इस औरत को बोलिये पहले अपना चेहरा दिखाये की हम पहचाने के हम इसी के गवाह है अब काज़ी ने कहा अपना चेहरा दिखाओ बाज़ सूरतें होती है चेहरा देखने कि अब वो औरत थी उसके हाथ काँप रहे थे कि वो चाहती नहीं थी मेरा चेहरा मेरे शौहर के अलावा कोई गैर मर्द देखे अब गैरतमंद शौहर ने आवाज़ लगाता है के काज़ी साहब मै अपनी बीवी का महेर देने के लिए तैयार हूँ इसको बेपर्दा न करे मुझे ये गवारा नहीं है कि मेरी बीवी को कोई ग़ैर मर्द देखे अब उस औरत ने ये देखा कि मेरा शौहर इतना गैरत मन्द है कि उसको यही गवारा नहीं के मेरा चेहरे को कोई गैर मर्द देखे फिर इस ने कहा काज़ी साहब मेरा शौहर इतना गैरत मन्द है मै इससे महेर ले कर क्या करुँगी मैने इसको अपना माहेर माफ कर दिया। *सुब्हान अल्लाह!!!*
ये पहले ऐसा दौर था शौहर गैरत मन्द थे और आज बेग़ैरती इस क़द्र फ़ैल गयी है हमारे मुआशरे में कि अब खुद बेपर्दा घुमते है और इस पर फ़ख्र करते है समझते भी नहीं है न ही इस पर संजिदा होते है। *माज़ अल्लाह!!!*
बे-पर्दा कल जो आयी नज़र चंद बीविया
अकबर ज़मी में गैरते क़ौमी से गढ़ गया
पूछा जो मैंने आपके पर्दे को क्या हुआ??
बोली वो हमें कि अक्ल पे मर्दो के पढ़ गया!!😰
ये मर्द कि अक्ल पर पढ़ने वाला पर्दा है ये मर्द कि गैरत कि कमी है ये मर्द कि दीन और इस्लाम पर क़ुरआन व हदीस पर दुरुस्त न समझने का नातिजा है के कही इसकी माँ बेपर्दा है तो कही इसकी बहनें बेपर्दा है तो कही इसकी बीवी बेपर्दा है स्लीवलेस पहेन कर बाजार निकलती है कह कह कर भाई कितना कहे पर्दा करो बुरका पहनों यहाँ बुरका गया चादर भी गयी दुपट्टा भी गया अब जो बचा था वो भी मर्दो के कपडे पहनने लगी अल्लाह कि पनाह इन औरतों को अल्लाह हिदायत दे हमारे मुआशरे से गैरती का जनाज़ा निकल रहा है इनकी बे-पर्दगी कि वजह से ये तो हमारी इन्फेरादि ज़िम्मेदारी है कि हम अपने घर में पर्दे का दर्स दें!
वो हमारी इस्लामी बहने जो सैय्यदुना फातिमा जहरा से मुहब्बत करने वलियाँ है आप बताइये कि आप उनसे मुहब्बत करती है जिनकी ख़्वाहिश ये थी मेरे इन्तेकाल के बाद मेरे कफ़न को भी कोई गैर मर्द न देखे इस्लामी दीन कि पर्दे के बारे में बातें जो है वो भी भूल गयी आज कहती है आज का दौर बढ़ गया हम कहते है आज के दौर में ज्यादा हाजत है पर्दे कि क्योंकि बेशर्मी बढ़ गयी बे-ग़ैरती बढ़ गयी बे-हयाई बढ़ गयी गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के कल्चर बढ़ गया अल्लाह करे हमारी इस्लामी बहनों को हया कि चादर नसीब हो जाये।
अगर इन मगरिबी सोच को अपना लिया फिर कहा कि रहेंगी आप खुद सोचें क्या मरना नहीं है ये बेपर्दगी मॉडर्न कल्चर कितने दिन रहेगा आखिर मर कर कफ़न भी चादरों कि ही मिलेगी क्या अज़ाब ए क़ब्र से डर नहीं लगता खुदारा सोचे अपनी आख़िरत को बचायें।
अल्लाह क़ुरआन में इर्शाद फ़रमाता है
یٰۤاَیُّهَا الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا قُوْۤا اَنْفُسَكُمْ وَ اَهْلِیْكُمْ نَارًا وَّ قُوْدُهَا النَّاسُ وَ الْحِجَارَةُ
अये इमान वालो अपनी जानो और अपने घर वालो को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन आदमी और पत्थर है।
*बाक़ी अगली पोस्ट में...!*
*✍🏻_____फ़िक़्र ए आख़िरत*

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